सत साहेब जी,
सभी प्यारे भाई बहनों को
आज का दिन बहुत विशेष है, खासतौर से हमारे लिए क्योंकि आज ही के दिन अर्थात 17 फरवरी, 1988 को हमारे पिता बन्दी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी ने दादा गुरुजी स्वामी रामदेवानन्द जी महाराज जी से दीक्षा ली थी। आज सतगुरु रामपाल जी महाराज जी का बोध दिवस है। सन 1994 में स्वामी रामदेवानन्द जी महाराज ने सन्त रामपाल जी महाराज जी को नाम दीक्षा देने का आदेश दिया और तभी से सन्त रामपाल जी महाराज जी ने इस भक्ति को परवान चढ़ाया है।
इस भक्ति मार्ग में कितनी परेशानियां आईं, कितने कष्ट आये, कितनी ही बार गलत अफवाहें फैलाई गईं लेकिन सन्त रामपाल जी महाराज जी ने असत्य के सामने झुकने के बजाय सत्य की कांटों भरी राह पर ही चलना स्वीकार किया क्योंकि संतजी जानते हैं कि आज जिस राह में कांटे हैं, कल उसी राह में फूल भी खिलेंगे।
जितना संघर्ष सन्त रामपाल जी महाराज जी ने सत्य को ऊपर लाने और परमात्मा का ज्ञान पूरे विश्व में फैलाने के लिये किया, इतना शायद किसी और में नहीं किया होगा। फिर भी सन्त रामपाल जी महाराज जी ने कभी ऊफ तक नहीं की। क्योंकि वो हमारे पिता हैं और पिता चाहे खुद दुख पा ले लेकिन अपने बच्चों को कभी भी दुखी नहीं देख सकते हैं।
जो लोग सन्त रामपाल जी महाराज जी को साधारण इंसान मान रहे हैं वो अपने आप को अभी तक अंधेरे में ही रखे हुए हैं, जब वो धर्मराज के पास जाएंगे तब अपने इस गुनाह को याद करके रोयेंगे और पछतायेंगे क्योंकि, वहां उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। तब उन्हें समझ में आएगा कि सन्त रामपाल जी महाराज जी उसी कबीर परमात्मा के अवतार हैं जिन्हें पहचानने में हमने पहले भी गफलत कर दी। लेकिन अब परमात्माने हमारे ऊपर दया की है, फिर से पहचानने का एक मौका दिया। इस मौके को अब हाथ से जाने मत देना वरना ये गलती हमें चौरासी के कष्टों तक पहुंचा देगी।
बन्दी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
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