बस लिखता गया.....
मुझे ये पता ही नहीं चला की ,
मै क्या लिखना चाहता था ।
और क्या लिखने लग गया।।
बस मेरी उंगलिया ,
यूँ ही लिखती गई ।
और लिखते गए।।
कुछ सोचा नही कुछ समझा नहीं ,
बस लिखता गया लिखता गया।।
कुछ रुक कर सोचा तो,
सोच भी न पाया की क्या लिखूँ ।
बस लिखता गया लिखता गया।।
सपनों की रूह को टटोलता फिरता रहा,
मै यूँ दर-बदर फिरता रहा ।।
कुछ मिल जाये तो जोड़ लूँ ,
में अपने बादे के साये में ।।
पर मिल न सका कुछ ।
और लिखता गया लिखता गया।।
ख्वाब मे खो-सा गया,
यादों की राह में कुछ थम-सा गया ।
कोई आया, कोई गया,कोई है, कोई है हरदम।।
बस लिखता गया,,,,,
लिखता गया ,,,,,,
Advertising
/https%3A%2F%2Ffbcdn-profile-a.akamaihd.net%2Fhprofile-ak-xaf1%2Fv%2Ft1.0-1%2F10366051_1435171516735945_2961300913844171161_n.jpg%3Foh%3Df9f9a3dbdd26aad3c858c65d40b00b84%26oe%3D565E71E4%26__gda__%3D1452975867_f2874bd897142a9506849306de8c0776)
