
सत्त साहिब जी सतगुरू जी कहते ह की ऊजड खेडे ठिकरी धड धड ग्ये कुमहार वो रावनं जैसा चला गया लांका के सारदार मनं माया का खायाल ह ये भ्रं रहा संसार ज़िसको तू आपना काहे ये तेरा नहीं ह गवार सत्त साहिब जी सतगुरू का नाम ही आपना ह जी
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सत्त साहिब जी सतगुरू जी कहते ह की ऊजड खेडे ठिकरी धड धड ग्ये कुमहार वो रावनं जैसा चला गया लांका के सारदार मनं माया का खायाल ह ये भ्रं रहा संसार ज़िसको तू आपना काहे ये तेरा नहीं ह गवार सत्त साहिब जी सतगुरू का नाम ही आपना ह जी